Prestressed Concrete in Hindi | Advantages and Disadvantages

इस आर्टिकल में हमने prestressed concrete को हिंदी में समझाया है। जैसे की prestressed concrete क्या है। prestressed concrete के advantages और disadvantages क्या है। प्रेसट्रेस्सिंग के प्रकार कितने है।  और भी बहुत कुछ बताया है इस आर्टिकल में।  तो पूरा आर्टिकल पड़इये।

prestressed concrete in hindi

What is Prestressed Concrete?

Prestressed concrete ये कंक्रीट का एक प्रकार है जिसमे प्रेसट्रेस्सेड कंक्रीट पर पहले से ही calculated फाॅर्स एंड moment लगा दिया जाता है जिससे कंक्रीट के ऊपर लग रहे force और moment  के कारन पैदा हो रहा  stress उसके लिमिट में आ जाता है।

अगर simple भाषा में समझाया जाये तो,

प्रेसट्रेस्सेड कंक्रीट ये कंक्रीट का वो प्रकार है जिसमे वायर डालकर उस वायर को खींचा  जाता है। जिससे कंक्रीट में aditional stress पैदा हो जाती है। जिससे कंक्रीट पर लग रहे फाॅर्स के कारन पैदा हो रही stress और पहले से लगायी हुयी stress  का resultant stress तय की गयी लिमिट में रहता है।

prestressed concrete

simply supported beam में load लगने पर बीम में saging moment  पैदा होती है। जिससे बीम के ऊपर के भाग में compression और नीचे के भाग में tension पैदा होता है।

वही,

simply supported beam के neutral axis के निचे वायर रखकर उसे खींचा  जाये तो वायर में स्ट्रेस्ड पैदा होता है। जिससे कंक्रीट में hogging moment पैदा होती है।

जिससे कंक्रीट का पूरा भाग compression में रहता है। जिससे टेंशन के कारन पड़ रही cracks को रोका जा सकता है।

Types of Prestressing :

प्रिस्ट्रेस्सिंग के दो प्रकार है।
  1. Pre-tensioning 
  2. Post-tensioning 

1. Pre-tensioning:

pre tensioning of concrete
  • प्रिस्ट्रेस्सिंग की इस मेथड में सबसे पहले कंक्रीट के लिए formwork तैयार किया जाता है।
  • फिर उसमे wires को place करके अच्छे से arrange कर दिया जाता है।
  • फिर wires को जेक की मदद से खींचकर उसे बांध दिया  जाता है।
  • फिर उसके ऊपर कंक्रीटिंग किया जाता है।
  • फिर कंक्रीट के बराबर सख्त हो जाने के बाद wires/cables के ends को काट दिया जाता है। जिससे wires छोटे होने  try करते है।  जिससे कंक्रीट में compression पैदा होती है।

2. Post-tensioning: 

post-tensioning of concrete
  • प्रिस्ट्रेस्सिंग की इस मेथड में सबसे पहले कंक्रीट के लिए formwork तैयार किया जाता है।
  • फिर उसमे plastic pipes को  place करके अच्छे से arrange कर दिया जाता है।
  • फिर उसके ऊपर कंक्रीटिंग किया जाता है।
  • फिर कंक्रीट के बराबर सख्त हो जाने के बाद wires/cables को प्लास्टिक पाइप्स में डालकर उसे जेक की मदद से से खींचकर बांध  है।
simply प्रीटेंशनिंग में wires को कंक्रीट के सख्त होने से पहले खींचा जाता है।  वही पोसटेंशनिंग में wires  कंक्रीट के सख्त हो  जाने के बाद खींचने में आता है।

Advantages of Prestressed Concrete:

  • प्रिस्ट्रेस्सेड कंक्रीट की मदद से tension cracks को कम किया जा सकता। है।
  • स्टील को जंग नहीं  लगता है।
  • Prestressed concrete के सेक्शन की साइज RCC के सेक्शन की साइज से कम होता है।
  • structure का वजन कम होता है जिससे फाउंडेशन कॉस्ट कम होता है।
  • Prestressed Concrete का impact और Fatigue के सामने resistant ज्यादा  होता है।
  • Beam की live load कैपेसिटी बढ़ती है।

Disadvantages of Prestressed Concrete :

  • High Grade  के कंक्रीट की जरूर  पड़ती है।
  • High Grade Steel / Cables की जरूर है।
  • Good Quality of control  की जरूर पड़ती है।
  • Formowrk बनाने में तकलीफ आती है।
  • Labor कॉस्ट बढ़ जाता है।
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